रेड अलर्ट..: संजीदा कहानी, रियलिस्टिक मेकिंग
मुख्य कलाकार : सुनील सेट्टी, समीरा रेड्डी, नसीरूद्दीन शाह, बिनोद खन्ना, गुलशन ग्रोवर, सीमा बिस्वास, आशीष विद्यार्थी, आएशा धारकर
निर्देशक : अनंत नारायण महादेवन
तकनीकी टीम : निर्माता- टी पी अग्रवाल, राहुल अग्रवाल, संगीत- ललित पंडित, गीत- जावेद अख्तर
यदि लेखक उम्दा हो तो निर्देशक कमाल कर सकता है। निर्देशक अनंत महादेवन की रेड अलर्ट-द वार विदिन के मामले में यह बात साबित हुई है। अरूणा राजे की मजबूत लेखनी की बदौलत रेड अलर्ट अनंत महादेवन की अब तक की श्रेष्ठ फिल्म साबित होती है। अनंत ने रेड अलर्ट में नक्सलवाद से जुड़ी एक संजीदा कहानी पेश की है।
रेड अलर्ट-द वार विदिन आंध्र प्रदेश के एक रसोइए के जीवन की सच्ची घटना पर आधारित फिल्म है। नरसिम्हा एक सीधा-सादा रसोइया है। एक दिन वह जंगल में नक्सलियों को खाना पहुंचाने जाता है। उसी समय पुलिस और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ होती है और नरसिम्हा की जिंदगी हमेशा के लिए बदल जाती है। नरसिम्हा को नक्सली जबरन अपने आंदोलन का हिस्सा बना लेते हैं। नरसिम्हा का बीबी और दो बच्चों का छोटा सा परिवार है। वह अपने बच्चों को स्कूल में पढ़ाना चाहता है। परिवार के लिए मजबूरी में नरसिम्हा नक्सली बन जाता है। सरल स्वभाव के नरसिम्हा को नक्सलियों के आंदोलन का अर्थ समझ में नहीं आता। वह कहता है कि दोनों तरफ अपने लोग ही हैं। फिर खून-खराबा क्यों? नरसिम्हा नक्सलियों के समूह से भागता है और स्थिति ऐसी बनती है कि पुलिस और नक्सली दोनों उसकी जान के दुश्मन बन जाते हैं।
रेड अलर्ट की मेकिंग रियलिस्टिक है। सुनील शेट्टी ने नरसिम्हा के किरदार को समझकर उसे प्रभावी तरीके से जीवंत किया है। उन्होंने नरसिम्हा की विवशता और लाचारी को मेच्योरिटी से पेश किया है। समीरा रेड्डी फिल्म में पुलिस द्वारा सेक्सुअली प्रताडि़त महिला हैं, जो बदला लेने के लिए नक्सली बन जाती है। समीरा फिल्म में बिना मेकअप के हैं। उन्होंने साबित किया है कि वे सिर्फ ग्लैमर डाल नहीं हैं। आशीष विद्यार्थी, सीमा बिस्वास, विनोद खन्ना, आएशा धारकर का अभिनय प्रभावी है। नसीरूद्दीन शाह के किरदार का छोटा
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